क्या अंग्रेजों से पहले भारत का अस्तित्व था?
अक्सर यह बहस छेड़ी जाती है कि अंग्रेजों के आने से पहले भारत एक बिखरा हुआ भूभाग था और ब्रिटिश साम्राज्य ने ही इसे एक राष्ट्र के रूप में जोड़ा। यहाँ तक कि विंस्टन चर्चिल जैसे नेताओं ने भी दावा किया था कि भारत कोई देश नहीं बल्कि केवल एक भौगोलिक शब्द था। लेकिन इतिहास को गहराई से देखने पर यह दावा पूरी तरह भ्रामक और गलत साबित होता है।
सच तो यह है कि आधुनिक राजनीतिक सीमाओं से बहुत पहले ही भारत की एक मजबूत सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भौगोलिक पहचान थी। हज़ारों साल पुराने वेदों, पुराणों और महाभारत जैसे ग्रंथों में 'भारतवर्ष' का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, जो हिमालय से लेकर समुद्र तक फैले इस अखंड भूभाग को परिभाषित करता है। मौर्य साम्राज्य और मुगल काल के दौरान भी भारत का एक बड़ा हिस्सा एक केंद्रीय राजनीतिक व्यवस्था के तहत एकजुट था।
यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों से आए प्राचीन यात्री—चाहे वे मेगस्थनीज हों, ह्वेन सांग हों या अल-बरूनी—भारत को एक समृद्ध और एकीकृत सभ्यता के रूप में ही देखते थे, न कि छोटे-छोटे स्वतंत्र टुकड़ों के रूप में। पूरी दुनिया में भारत को अपनी साझा संस्कृति, दर्शन और आर्थिक समृद्धि के लिए जाना जाता था।
इसलिए, यह सोचना कि अंग्रेजों ने भारत का निर्माण किया, ऐतिहासिक सच्चाई को नकारना है। अंग्रेजों ने केवल प्रशासनिक और औपनिवेशिक नियंत्रण के लिए अपनी सीमाएं तय कीं, लेकिन एक राष्ट्र और सभ्यता के रूप में भारत का अस्तित्व सदियों पुराना और अटूट है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।