मनुष्य कौन बनाता है – भगवान या कर्म?
अक्सर लोग सोचते हैं कि क्या भगवान ने मनुष्य को सीधे बनाया है। लेकिन गहराई से देखें तो जीवन की रचना में कर्म की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आध्यात्मिक दृष्टि से, यह नहीं कहा जा सकता कि भगवान ने सीधे तौर पर प्रत्येक व्यक्ति को आकार दिया। बल्कि, इंसान अपने कर्मों से अपना जीवन बनाता है।
हर व्यक्ति के जन्म, व्यवहार और भाग्य पर उसके पिछले और वर्तमान कर्मों का प्रभाव होता है। यही कर्मचक्र हमें जन्म-मृत्यु के बंधन में बांधे रखता है। लेकिन भगवान की स्थिति अलग है। वह स्वयंभू हैं – न उनका कोई स्रोत है, न कर्मों का बंधन। वे सबके ऊपर हैं, हर जीव के अंतर्यामी हैं।
इसलिए यह समझना जरूरी है कि भगवान जगत के निर्माता के रूप में तो हैं ही, लेकिन मनुष्य का जीवन-रूप उसके कर्मों की देन है। अच्छे कर्म करने से जीवन उज्ज्वल होता है, और बुरे कर्म उसे बार-बार जन्म और दुख में डालते हैं।
अंत में, भगवान की कृपा और क
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।