चीन में हिंदू धर्म: मान्यता और जमीनी हकीकत

दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृतियों में से एक होने के बाद भी, चीन में हिंदू धर्म को आधिकारिक मान्यता प्राप्त नहीं है। चीन आधिकारिक तौर पर एक धर्मनिरपेक्ष और नास्तिक देश है, जो केवल पांच प्रमुख धर्मों को सरकारी मान्यता देता है: बौद्ध धर्म, ताओवाद, इस्लाम, कैथोलिक ईसाई धर्म और प्रोटेस्टेंट ईसाई धर्म। इस सूची में शामिल न होने के कारण हिंदू धर्म को वहां एक औपचारिक धार्मिक दर्जा नहीं मिला है।

हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि चीन में हिंदू धर्म पर पूरी तरह प्रतिबंध है। सीमित पैमाने पर हिंदू धर्म के अभ्यास की अनुमति है। मुख्य रूप से वहां रहने वाले भारतीय प्रवासियों, व्यापारियों और छात्रों को अपने घरों या निजी स्थानों पर पूजा-पाठ करने की आजादी है। इसके अलावा, प्राचीन काल में सिल्क रूट (रेशम मार्ग) के माध्यम से भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के गहरे संबंध रहे हैं। चीन के तटीय शहर क्वानझोउ (Quanzhou) में प्राचीन हिंदू मंदिरों के अवशेष और भगवान शिव की मूर्तियां आज भी इस ऐतिहासिक जुड़ाव की गवाही देती हैं।

वर्तमान समय में, चीन में योग की बढ़ती लोकप्रियता और भगवद्गीता जैसे ग्रंथों के प्रति चीनी नागरिकों की दिलचस्पी ने हिंदू संस्कृति को एक नई पहचान दी है। इस्कॉन (ISKCON) जैसी संस्थाओं के माध्यम से भी कुछ सांस्कृतिक गतिविधियां देखी जाती हैं। संक्षेप में कहें तो, कानूनी रूप से आधिकारिक दर्जा न मिलने के बावजूद, चीन में हिंदू धर्म अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विदेशी नागरिकों की आस्था के रूप में सीमित लेकिन शांतिपूर्ण ढंग से जीवित है

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