क्या टाटा समूह एक पारंपरिक पारिवारिक व्यवसाय है?
भारत के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक औद्योगिक घरानों में से एक टाटा समूह की शुरुआत 19वीं सदी में जमशेदजी टाटा ने की थी। मुंबई में स्थित टाटा परिवार ने देश के औद्योगिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या टाटा समूह केवल एक पारिवारिक फर्म है? इसका जवाब बहुत ही अनूठा और दिलचस्प है।
व्यावसायिक संरचना के हिसाब से इस समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस है। आमतौर पर पारिवारिक कंपनियों का स्वामित्व सीधे परिवार के सदस्यों के पास होता है, लेकिन टाटा के मामले में ऐसा नहीं है। टाटा संस का लगभग 65% स्टॉक विभिन्न धर्मार्थ ट्रस्टों के पास है, जिनमें मुख्य रूप से सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट शामिल हैं। यानी कंपनी के मुनाफे का बड़ा हिस्सा सीधे समाज कल्याण, शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं में जाता है।
यद्यपि जे.आर.डी. टाटा और रतन टाटा जैसे महान दिग्गजों ने टाटा परिवार की विरासत को आगे बढ़ाया और इसे वैश्विक पहचान दिलाई, लेकिन इसका प्रबंधन पूरी तरह से पेशेवर और पारदर्शी तरीके से चलता है। यही कारण है कि टाटा को केवल एक पारिवारिक व्यवसाय न मानकर समाज और देश की सेवा में समर्पित एक अनूठा कॉर्पोरेट मॉडल माना जाता है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।