पश्चाताप: एक दिव्य उपहार
कई बार हम सोचते हैं कि पश्चाताप हमारी अपनी कोशिश का नतीजा है — जैसे हमें खुद अपने मन को बदलना होता है। लेकिन सच तो यह है कि पश्चाताप स्वयं भगवान की देन है। यह नहीं कि हम इतना पछताते हैं कि भगवान खुश हो जाएंगे, बल्कि वह हमारे हृदय में पश्चाताप की भावना जगाते हैं।
इसलिए अगर आप महसूस कर रहे हैं कि आपका हृदय कठोर हो गया है, तो घबराएं नहीं। आप प्रार्थना कर सकते हैं: “हे प्रभु, मेरे हृदय में पश्चाताप की भावना उत्पन्न कर। मुझे अपने अतीत के कार्यों पर दुख हो, लेकिन वह दुख मेरे लिए नहीं, तुम्हारे लिए हो।”
पश्चाताप सिर्फ गलतियों के लिए आंसू बहाना नहीं है। यह एक जीवंत संबंध की शुरुआत है। जब हम ईश्वर से कहते हैं — “हे प्रभु, मन फिराओ!” — तो वह हमारे अंदर एक नया हृदय डालता है। एक हृदय जो पाप से घृणा करता है, लेकिन क्षमा के लिए आशीर्वाद ढूंढता है।
तो याद रखें, पश्चाताप कोई दंड नहीं, बल्कि करुणा है। यह भगवान की ओर ल
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