क्या भगवान सबकी सुनते हैं?
हाँ, भगवान सबकी सुनते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे हर मांग पूरी कर देते हैं। वह सुनते हैं, समझते हैं और हर एक के भीतर बसे आत्म-सत्य को जानते हैं। वह केवल आवाज़ सुनते नहीं, बल्कि दिल की धड़कन, आँखों के आँसू, चुप्पी में छिपी चिल्लाहट भी पहचान लेते हैं।
भगवान को हम अक्सर किसी राजा या न्यायाधीश की तरह सोचते हैं—बैठे हैं कहीं ऊपर, आकार वाले, तख्त पर बिराजमान। लेकिन सच तो यह है कि वह निराकार हैं। उनका कोई रूप नहीं, फिर भी हम अपने प्यार, डर और आस्था के कारण उन्हें मां, पिता, बच्चे या सैनिक के रूप में देखते हैं। यह सब हमारी भावनाओं की छवि है।
उनका वास तो हर जगह है। वह न सिर्फ दुआओं में बल्कि गुस्से, ग़म और खुशी में भी मौजूद हैं। जैसे कहा गया—"मैं वही हूं जो तुम हो"—तो यही बताता है कि वह दूर नहीं, हमारे भीतर ही विराजमान हैं। हम जब भी दुखी होते हैं, प्रार्थना करते हैं, उस पल वह हमारी उम
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।