क्या भगवान सचमुच सिर्फ एक है?
सदियों से मानव सभ्यता में एक सवाल हमेशा गूंजता रहा है—क्या भगवान सिर्फ एक है? अलग-अलग धर्मों, रीति-रिवाजों और प्रार्थना के तरीकों को देखकर अक्सर ऐसा लगता है कि ईश्वर के कई रूप हैं। लेकिन अगर हम संसार के पवित्र ग्रंथों की गहराई में उतरें, तो सच्चाई कुछ और ही नजर आती है।
इतिहास गवाह है कि समय-समय पर दुनिया में ऐसे महान संत और मार्गदर्शक आए हैं, जिन्होंने हमें अध्यात्म का सही रास्ता दिखाया है। इन संतों ने किसी एक विचारधारा तक सीमित न रहकर गुरु ग्रंथ साहिब, वेद, पुराण, कुरान शरीफ, बाइबल और बौद्ध व जैन धर्म के प्राचीन ग्रंथों का गहरा अध्ययन किया। जब इन तमाम पवित्र पुस्तकों के ज्ञान को आपस में मिलाकर देखा गया, तो एक बेहद खूबसूरत और स्पष्ट बात सामने आई—पूर्ण परमात्मा वास्तव में केवल एक ही है।
अक्सर लोग बाहरी तौर-तरीकों और भाषाओं के अंतर के कारण उलझ जाते हैं। कोई उन्हें अल्लाह कहता है, कोई ईश्वर, तो कोई गॉड या वाहेगुरु। लेकिन जैसे अलग-अलग भाषाओं में पानी को जल, नीर या वॉटर कहने से उसकी प्यास बुझाने की ताकत नहीं बदलती, ठीक वैसे ही परमात्मा का अस्तित्व भी नहीं बदलता। सभी पवित्र ग्रंथ एक ही परम शक्ति की ओर इशारा करते हैं, जो ब्रह्मांड के कण-कण में मौजूद है और हर जीव का पालन-पोषण करती है।
इसलिए, रूपों और नामों के भेदभाव से ऊपर उठकर यह समझना जरूरी है कि वह सर्वोच्च सत्ता एक ही है। जब हम इस परम सत्य को स्वीकार कर लेते हैं, तो आपस के सारे मतभेद खत्म हो जाते हैं और मानवता के सच्चे धर्म की शुरुआत होती है।
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