क्या भारत कर्ज मुक्त देश है?
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या भारत एक शून्य कर्ज या ऋण मुक्त देश है? इसका सीधा जवाब है – नहीं। दुनिया के अधिकांश देशों की तरह भारत सरकार और भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी विदेशी और घरेलू ऋण मौजूद है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च 2022 तक भारत का कुल बाहरी ऋण (External Debt) लगभग 620.7 बिलियन डॉलर दर्ज किया गया था। यह राशि देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी (GDP) का लगभग 19.9% है। किसी भी देश के विकास और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के लिए कर्ज लेना एक सामान्य आर्थिक प्रक्रिया है।
भारत के इस बाहरी कर्ज की संरचना को दो भागों में समझा जा सकता है:
1. दीर्घकालिक ऋण (Long-term Debt): भारत के कुल बाहरी कर्ज का सबसे बड़ा हिस्सा यानी लगभग 80.4% दीर्घकालिक ऋण के रूप में है। यह लंबी अवधि के लिए लिया गया कर्ज होता है, जो अर्थव्यवस्था पर तुरंत दबाव नहीं डालता।
2. अल्पकालिक ऋण (Short-term Debt): कुल कर्ज का लगभग 19.6% हिस्सा कम अवधि या अल्पकालिक ऋण का है, जिसका भुगतान जल्द करना होता है।
राहत की बात यह है कि कुल जीडीपी की तुलना में कर्ज का यह अनुपात नियंत्रित स्थिति में है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत किसी विदेशी कर्ज संकट का सामना नहीं कर रहा है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार इस ऋण को संभालने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
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