क्या भारत और चीन दोस्त बन सकते हैं?
अगर भारत और चीन वाकई दोस्त होते, तो एशिया का चेहरा ही बदल जाता। दोनों देशों की आबादी मिलाकर दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी है। इतनी बड़ी आबादी के साथ अगर सहयोग होता, तो क्षेत्रीय व्यापार और आर्थिक विकास की गति तेज होती। सीमा विवाद के बजाय सहयोग होता, तो दोनों देश गरीबी, बेरोजगारी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों पर मिलकर काम कर सकते थे।
लेकिन हकीकत अलग है। इतिहास, सीमा विवाद, रणनीतिक अविश्वास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण दोनों देशों के बीच दूरी बनी हुई है। गलवान घाटी में झड़पें, अरुणाचल प्रदेश पर विवाद, और चीन का पाकिस्तान के साथ करीबी रिश्ता भारत के लिए चिंता का विषय है। वहीं, भारत का पश्चिमी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी चीन को असहज करती है।
फिर भी, दोनों देश एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते। व्यापार के आंकड़े बताते हैं कि चाहे राजनीति में तनाव हो, लेकिन अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से
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