चिकनपॉक्स की खोज कैसे हुई?

चिकनपॉक्स आज हमारे लिए एक आम बचपन की बीमारी है, लेकिन इसे चेचक जैसी अन्य बीमारियों से अलग पहचानने में चिकित्सा जगत को 19वीं शताब्दी तक इंतजार करना पड़ा।

इस बीमारी के बारे में स्पष्ट समझ 1875 में आई, जब जर्मन चिकित्सक रूडोल्फ स्टेनर ने एक महत्वपूर्ण प्रयोग किया। उन्होंने एक ऐसे मरीज के चिकनपॉक्स के छालों से निकले तरल पदार्थ को स्वस्थ स्वयंसेवकों में टीके के रूप में लगाया। इस प्रयोग से पता चला कि यह बीमारी किसी संक्रामक कारक के कारण होती है, न कि बस एक आनुवंशिक या वातावरणीय समस्या।

इस खोज ने चिकनपॉक्स को चेचक और अन्य त्वचा संबंधी संक्रमणों से अलग करने का रास्ता साफ किया। हालांकि तब वायरस की अवधारणा अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हुई थी, लेकिन स्टेनर के काम ने भविष्य में वेरिसेला-जोस्टर वायरस की खोज की नींव रखी।

आज हम जानते हैं कि चिकनपॉक्स एक वायरस जनित बीमारी है जिससे बचाव के लिए टीके

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय