चीन को 'दूसरी दुनिया' का देश क्यों कहा जाता है?

शीत युद्ध (Cold War) के दौरान दुनिया के देशों को राजनीति और विचारधारा के आधार पर मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया था, जिसे थ्री-वर्लड्स मॉडल कहा जाता है। इस वर्गीकरण के तहत, सोवियत संघ के नेतृत्व वाले कम्युनिस्ट और समाजवादी देशों को 'दूसरी दुनिया' का हिस्सा माना जाता था।

चीन इस दूसरी दुनिया का एक प्रमुख देश था क्योंकि उसने सोवियत संघ के साथ मिलकर पूर्वी ब्लॉक के समाजवादी और साम्यवादी देशों का नेतृत्व किया था। इसके विपरीत, अमेरिका और नाटो से जुड़े लोकतांत्रिक एवं पूंजीवादी देश 'पहली दुनिया' में आते थे, जबकि किसी भी गुट में शामिल न होने वाले तटस्थ देशों को 'तीसरी दुनिया' कहा जाता था।

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