चीन का बढ़ता वैश्विक कर्ज जाल: 150 से अधिक देशों पर ट्रिलियन डॉलर का बोझ

आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि दुनिया के कितने देश चीन के आर्थिक प्रभाव में आ चुके हैं। आंकड़ों और हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की सरकार और उसकी दिग्गज कंपनियों ने दुनिया भर के 150 से भी अधिक देशों को कर्ज दिया है। यह लोन केवल सामान्य व्यापारिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बेहद विशाल हो चुका है।

हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू (Harvard Business Review) की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन द्वारा दिए गए इस अंतरराष्ट्रीय लोन का कुल आंकड़ा 1.5 ट्रिलियन डॉलर (यानी लगभग 112 लाख 50 हजार करोड़ रुपए) से भी अधिक पहुंच चुका है। यह इतनी बड़ी धनराशि है जो कई विकसित देशों की कुल जीडीपी (GDP) से भी अधिक है।

चीन ने इस भारी वित्तीय सहायता को मुख्य रूप से अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स, जैसे कि 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के जरिए एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमरीका के विकासशील देशों तक पहुंचाया है। कई छोटे और वित्तीय रूप से कमजोर देश बंदरगाह, रेलवे, और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए चीन से भारी ब्याज दरों पर लोन ले चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कर्ज का एक बड़ा हिस्सा अपारदर्शी (hidden debt) है, जिसका सटीक हिसाब लगाना मुश्किल होता है। श्रीलंका और जाम्बिया जैसे देशों के उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि जब देश यह लोन चुकाने में असमर्थ होते हैं, तो वे चीन की 'कर्ज जाल कूटनीति' (Debt Trap Diplomacy) में फंस जाते हैं। यह स्थिति न केवल उन देशों की संप्रभुता के लिए खतरा बनती है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के संतुलन को भी प्रभावित करती है।

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