चीन अमेरिकी कर्ज क्यों खरीदता है?
वैश्विक अर्थव्यवस्था में यह सवाल अक्सर चर्चा में रहता है कि चीन अमेरिकी सरकार के खजाना बॉन्ड (Treasury Bonds) क्यों खरीदता है। इसका सीधा संबंध दोनों देशों के बीच व्यापार, वित्तीय सुरक्षा और डॉलर की वैश्विक स्थिति से है। जब चीन अमेरिका को सामान बेचता है, तो उसे बड़े पैमाने पर डॉलर प्राप्त होते हैं। इन डॉलरों को सुरक्षित और फलदायी बनाए रखने के लिए चीन अमेरिकी कर्ज में निवेश करता है।
चीन के इस वित्तीय निर्णय के पीछे दो सबसे प्रमुख कारण हैं:
पहला, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड दुनिया की सबसे सुरक्षित और स्थिर परिसंपत्तियों में गिने जाते हैं। वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बावजूद अमेरिकी सरकार द्वारा समय पर भुगतान की गारंटी रहती है। इस वजह से चीन का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार जोखिम से मुक्त रहता है और उसे नियमित ब्याज भी मिलता रहता है।
दूसरा, अमेरिकी डॉलर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में दुनिया की मुख्य आरक्षित मुद्रा (Reserve Currency) है। अधिकांश वैश्विक लेन-देन डॉलर में ही होते हैं, इसलिए चीनी केंद्रीय बैंक के लिए डॉलर-मूल्यवर्ग की संपत्तियां रखना एक व्यावहारिक मजबूरी और समझदारी दोनों है। इसके अलावा, डॉलर भंडार बनाए रखने से चीन अपनी मुद्रा 'युआन' के मूल्य को संतुलित रखने में भी सक्षम होता है, जिससे उसका निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धी बना रहता है।
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