भारत में जज के प्रकार: समझिए आसान भाषा में
कई बार हम सुनते हैं कि कोर्ट में डिस्ट्रिक्ट जज, एडीजे या फिर सेशन जज की बात होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये अलग-अलग पद हैं या फिर एक ही जज के अलग-अलग नाम? असल में, भारत में जजों की अलग-अलग रैंक और भूमिकाएं होती हैं, लेकिन कई बार एक ही व्यक्ति अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसा कि कानूनी प्रणाली में स्थिति के अनुसार उनकी भूमिका बदलती है।
डिस्ट्रिक्ट जज और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (एडीजे) कोर्ट प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तर हैं। जब एक जज सिविल मामलों की सुनवाई करता है, तो उसे डिस्ट्रिक्ट जज कहा जाता है। लेकिन जब वही जज आपराधिक (क्रिमिनल) मामलों की सुनवाई करता है, तो उसे सेशन जज कहा जाता है। यानी जज एक ही होता है, लेकिन उसकी भूमिका के आधार पर उसका शीर्षक बदल जाता है।यह व्यवस्था इसलिए है ताकि न्याय प्रणाली में स्पष्टता बनी रहे। एडीजे, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, डिस्ट्रिक्ट जज के साथ काम कर
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