जीवन का सत्य: धर्म और कर्म का मार्ग
जीवan का सच्चा सत्य ढूंढने की खोज में हर इंसान कभी न कभी रुकता है। कई बार हम भागते हुए जीवन में इतने खो जाते हैं कि सही और गलत के बीच की रेखा धुंधली होने लगती है। लेकिन जब हम धर्म से दूर होते हैं, तभी हम गलत मार्ग पर चल पड़ते हैं। धर्म सिर्फ एक धार्मिक विचार नहीं, बल्कि जीवन के नैतिक आधार है। यही हमें उस शाश्वत सत्य की ओर ले जाता है, जहां विवेक बोलता है, न कि स्वार्थ।
गीता की यह शिक्षा कि “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”, आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। इसका अर्थ है—तुम्हारा अधिकार केवल कर्म तक है, फल के लिए नहीं। यह वाक्य हमें बताता है कि जीवन में सफलता या असफलता के भय से मुक्त होकर अपना कर्तव्य निभाना ही सच्चा धर्म है। फल की चिंता छोड़कर कर्म में लगे रहने से मन शांत रहता है और जीवन का संतुलन बना रहता है।
जीवन का सत्य यही है कि जब हम अपने कर्मों में निष्ठा रखते हैं और धर्म के मार्ग पर चलते हैं, त
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