कृषि के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी का बढ़ता महत्व

आधुनिक दौर में जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) ने कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। लगातार बढ़ती जनसंख्या और घटती कृषि योग्य भूमि के बीच खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में इस तकनीक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। वैज्ञानिक अनुसंधानों और नई तकनीकों के माध्यम से फसलों की गुणवत्ता तथा उनकी कुल उत्पादकता में अभूतपूर्व वृद्धि की गई है।

आनुवंशिक अभियांत्रिकी (Genetic Engineering) की मदद से आज ऐसी फसलों की प्रजातियां विकसित की जा रही हैं, जो न केवल कीटों और बीमारियों से लड़ने में सक्षम हैं, बल्कि प्रतिकूल मौसम को भी सहन कर सकती हैं। इसके अतिरिक्त, फसलों की पोषण क्षमता को बढ़ाना इस तकनीक की एक प्रमुख उपलब्धि रही है। इसका एक प्रमुख उदाहरण विटामिन 'ए' से समृद्ध धान है, जो पोषण संबंधी कमियों को दूर करने में सहायक है। इसी प्रकार, अधिक अमीनो अम्ल से युक्त मक्का की विशेष किस्में भी तैयार की गई हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अधिक पौष्टिक हैं।

जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम हुई है। इससे पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता को सुरक्षित रखते हुए जैविक खेती को प्रोत्साहन मिल रहा है। संक्षेप में कहें तो, कृषि में जैव प्रौद्योगिकी का प्रयोग किसानों की आय बढ़ाने और भविष्य के लिए टिकाऊ खेती का आधार तैयार करने में अत्यंत मददगार साबित हो रहा है।

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