जैव प्रौद्योगिकी में प्रतिलेखन (Transcription) क्या है?
प्रतिलेखन (Transcription) कोशिका विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) की एक बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। आसान शब्दों में कहें तो, यह वह जैविक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कोशिका में स्थित डीएनए (DNA) की आनुवंशिक जानकारी (Genetic Information) को आरएनए (RNA), विशेष रूप से संदेशवाहक आरएनए (mRNA) में कॉपी किया जाता है।
हमारे शरीर या किसी भी जीव की कोशिकाओं में प्रोटीन बनाने का निर्देश डीएनए के पास होता है। लेकिन डीएनए खुद कोशिका के केंद्रक (Nucleus) से बाहर नहीं आता। इसलिए, प्रतिलेखन के दौरान RNA पॉलीमरेज़ (RNA Polymerase) नामक एंजाइम डीएनए के एक हिस्से को पढ़कर उसका एक पूरक आरएनए स्ट्रैंड तैयार करता है। यही आरएनए आगे चलकर प्रोटीन निर्माण (Translation) के लिए संदेश ले जाता है।
जैव प्रौद्योगिकी में इसका महत्व: आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी और जेनेटिक इंजीनियरिंग में प्रतिलेखन का ज्ञान बेहद अहम है। इंसुलिन जैसे रीकॉम्बिनेंट प्रोटीन बनाने, जेनेटिक विकारों के अध्ययन और mRNA टीकों (Vaccines) के निर्माण में प्रतिलेखन प्रक्रिया के सिद्धांतों का ही उपयोग किया जाता है। वैज्ञानिक प्रतिलेखन की दर को नियंत्रित करके कोशिकाओं से अपनी आवश्यकतानुसार विशिष्ट प्रोटीन तैयार करवाते हैं।
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