टमाटर: एक विदेशी फल जो भारतीय रसोई का दिल बन गया

आज बिना टमाटर के भारतीय खाने की कल्पना करना भी मुश्किल है। चाहे दाल में तड़का लगाना हो, कढ़ी बनानी हो या चटपटी चटनी तैयार करनी हो, टमाटर हर डिश का स्वाद बढ़ा देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी रसोई का यह अहम हिस्सा मूल रूप से भारत का है ही नहीं?

टमाटर का इतिहास काफी दिलचस्प है। इसकी शुरुआत दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वत क्षेत्र से हुई थी। 16वीं शताब्दी में, लगभग 1550 ईस्वी में पुर्तगाली इसे यूरोप ले गए। वहां से यह पूरी दुनिया में फैलना शुरू हुआ।

भारत में टमाटर का आगमन अंग्रेजों के ज़रिए हुआ। लगभग 1850 के आसपास अंग्रेज़ इसे भारत लेकर आए। शुरुआत में इसे केवल एक सजावटी पौधे या अंग्रेजों के खास भोजन के रूप में देखा जाता था। स्थानीय लोग इसके खट्टे स्वाद और लाल रंग के कारण इसे अपनाने में थोड़ा हिचकिचाते थे।

धीरे-धीरे, भारतीय शेफ और गृहणियों ने इसके स्वाद को समझा और इसे अपनी पारंपरिक करी और मसालों के साथ मिलाना शुरू किया। 20वीं शताब्दी तक आते-आते, टमाटर भारत के हर घर और खेत में जगह बना चुका था। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े टमाटर उत्पादक देशों में से एक है। एक ज़माने का 'विदेशी मेहमान' आज हमारी रोजमर्रा की डाइट का सबसे पसंदीदा हिस्सा बन चुका है।

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