टाटा ग्रुप क्यों नहीं बनाता टू-व्हीलर?

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में जब भी सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित गाड़ियों की बात होती है, तो टाटा मोटर्स का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि देश की इतनी बड़ी कंपनी होने के बावजूद टाटा ने कभी बाइक या स्कूटर क्यों नहीं बनाया?

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण टाटा ग्रुप के कठोर व्यावसायिक नियम और सुरक्षा को लेकर उनकी दूरदर्शी सोच है। टाटा ग्रुप का मानना है कि दोपहिया वाहन या स्कूटर सड़क पर यात्रा करने का सबसे असुरक्षित माध्यम हैं। इनमें दुर्घटना के दौरान चालक और सवार के लिए जोखिम बहुत अधिक होता है।

जमशेदजी टाटा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए रतन टाटा जी ने हमेशा जनहित और लोगों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है। यही वजह है कि टाटा ग्रुप ने कभी टू-व्हीलर सेगमेंट में कदम रखने के बारे में सोचा भी नहीं। इसके बजाय, उनका पूरा ध्यान हमेशा अपनी कारों को देश की सबसे सुरक्षित गाड़ियां बनाने पर रहा है।

आम आदमी को दोपहिया वाहनों के खतरे से बचाने के लिए ही रतन टाटा ने टाटा नैनो जैसी किफायती और सुरक्षित कार का सपना देखा था, ताकि एक मध्यमवर्गीय परिवार भी बाइक के बजट में सुरक्षित चार पहिया वाहन का सफर कर सके। सुरक्षा के प्रति यही समर्पण टाटा को अन्य ब्रांड्स से अलग बनाता है।

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