टाटा संस की असली ताकत किसके हाथों में है?

जब भी हम टाटा ग्रुप का नाम सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में भारत के सबसे भरोसेमंद और बड़े व्यापारिक साम्राज्य की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी विशाल कंपनियों का संचालन करने वाली मुख्य होल्डिंग कंपनी, टाटा संस (Tata Sons) में सबसे ज्यादा मालिकाना हक किसका है?

आमतौर पर लोगों को लगता है कि इसका मालिकाना हक किसी एक व्यक्ति के पास होगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। टाटा संस का सबसे बड़ा हिस्सा परोपकारी ट्रस्टों के पास है। इसमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट सबसे प्रमुख हैं। इन दोनों चैरिटेबल ट्रस्टों की टाटा संस में कुल मिलाकर लगभग 56% हिस्सेदारी है। अगर अन्य सभी टाटा ट्रस्टों को भी जोड़ दिया जाए, तो कुल मिलाकर लगभग 66% शेयर ट्रस्टों के पास ही हैं। यही वजह है कि टाटा समूह की कमाई का एक बड़ा हिस्सा समाज सेवा में जाता है।

अगर व्यक्तिगत शेयरधारकों की बात करें, तो ऐतिहासिक रूप से शापूरजी पलोनजी ग्रुप के दिवंगत कारोबारी पलोनजी शापूरजी मिस्त्री और उनका परिवार टाटा संस में सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयरधारक थे। मिस्त्री परिवार के पास टाटा संस की लगभग 18.4% हिस्सेदारी रही है। इसके अलावा, समूह की विभिन्न खुद की कंपनियों (जैसे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील) के पास भी कुछ छोटे हिस्से मौजूद हैं।

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