भारतीय रेलवे में ट्रेन ड्राइवर की सैलरी

भारतीय रेलवे में ट्रेन ड्राइवर, जिन्हें तकनीकी भाषा में लोको पायलट कहा जाता है, का वेतन उनके पद, अनुभव और तय की गई दूरी (किलोमीटर) पर निर्भर करता है। रेलवे में इस करियर की शुरुआत असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के रूप में होती है।

सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के अनुसार, एक नए असिस्टेंट लोको पायलट की शुरुआती बेसिक सैलरी 19,900 रुपये होती है। इसके साथ ही उन्हें कई तरह के भत्ते जैसे महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और परिवहन भत्ता मिलता है। इन सब को मिलाकर एक नए ड्राइवर का शुरुआती इन-हैंड वेतन लगभग 25,000 से 35,000 रुपये प्रति माह के बीच होता है।

अनुभव और प्रमोशन के साथ वेतन में वृद्धि

ट्रेन ड्राइवर्स के वेतन की सबसे खास बात यह है कि जैसे-जैसे उनका अनुभव बढ़ता है और वे अलग-अलग ट्रेनों की जिम्मेदारी संभालते हैं, उनकी सैलरी में भारी इजाफा होता है। पद के अनुसार मासिक वेतन का विवरण इस प्रकार है:

गुड्स ट्रेन लोको पायलट (मालगाड़ी): मालगाड़ी चलाने वाले ड्राइवर्स का वेतन लगभग 40,000 से 56,000 रुपये प्रति माह होता है।

पैसेंजर ट्रेन लोको पायलट: पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के ड्राइवर्स की सैलरी लगभग 50,000 से 66,000 रुपये प्रति माह तक पहुंच जाती है।

मेल और हाई-स्पीड ट्रेन लोको पायलट: राजधानी, शताब्दी, वंदे भारत और मेल एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनें चलाने वाले सीनियर ड्राइवर्स का वेतन सबसे अधिक होता है। इनकी सैलरी 60,000 रुपये से लेकर 85,000 रुपये प्रति माह या उससे भी अधिक हो सकती है।

इसके अलावा, ड्राइवर्स को सबसे बड़ा फायदा रनिंग अलाउंस (Running Allowance) का मिलता है, जो उनके द्वारा तय किए गए किलोमीटर के आधार पर तय होता है। साथ ही, नाइट ड्यूटी और ओवरटाइम भत्ते भी उनकी कुल कमाई को काफी बढ़ा देते हैं।

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