प्रसव के बाद प्राइवेट पार्ट में दर्द के मुख्य कारण और देखभाल

शिशु को जन्म देना एक खूबसूरत अहसास है, लेकिन डिलीवरी के बाद महिलाओं को कई शारीरिक बदलावों और असहजताओं से गुजरना पड़ता है। प्रसव के बाद प्राइवेट पार्ट (योनि क्षेत्र) में दर्द और संवेदनशीलता होना एक बेहद आम समस्या है, जिसका सामना अधिकांश नई माताएं करती हैं।

अक्सर महिलाओं को लगता है कि दर्द केवल तभी होता है जब डिलीवरी के दौरान कोई सर्जिकल चीरा (एपिसिओटॉमी) लगाया गया हो। हालांकि, यह पूरी तरह सच नहीं है। यदि प्रसव के दौरान कोई चीरा नहीं भी लगाया गया है, तो भी शिशु को बाहर धकेलते समय योनि और गुदा के बीच की मांसपेशियां (पेरिनियम क्षेत्र) खिंचकर फट सकती हैं। हालांकि मांसपेशियों का यह फटना आमतौर पर बहुत छोटा या मामूली होता है, लेकिन इसके कारण उस हिस्से में तेज सूजन, भारीपन और छूने पर अत्यधिक संवेदनशीलता महसूस हो सकती है। इसके अलावा, प्रसव के दौरान होने वाले तीव्र दबाव से आसपास की नसें और ऊतक भी प्रभावित होते हैं, जिससे रिकवरी में समय लगता है।

इस दर्द से राहत पाने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं। प्रभावित हिस्से पर आइस पैक या ठंडी सिकाई करने से सूजन और दर्द में तुरंत आराम मिलता है। इसके साथ ही, 'सिट्ज़ बाथ' (Sitz Bath) यानी एक टब में हल्का गुनगुना पानी भरकर उसमें कुछ देर बैठने से मांसपेशियों को राहत मिलती है और संक्रमण का खतरा भी कम होता है। नई माताओं को सलाह दी जाती है कि वे ढीले सूती अंतःवस्त्र पहनें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर खुद को हाइड्रेटेड रखें ताकि पेशाब के दौरान जलन न हो, और पूरी तरह ठीक होने तक भारी सामान उठाने से बचें। यदि दर्द असहनीय हो या वहां से असामान्य स्राव (डिस्चार्ज) हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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