डिलिवरी के समय क्यों जरूरी है कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन?

गर्भावस्था और शिशु का जन्म एक बेहद नाजुक प्रक्रिया है। कभी-कभी कुछ चिकित्सीय कारणों से जब समय से पहले यानी प्रीमैच्योर डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है, तो डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चे के फेफड़ों को सुरक्षित रखने की होती है। ऐसी स्थिति में गर्भवती महिला को कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन दिए जाते हैं।

इन इंजेक्शन्स में मुख्य रूप से डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) और बेटामेथासोन (Betamethasone) शामिल हैं। यह दवा मां के शरीर से होती हुई गर्भनाल (प्लेसेंटा) के जरिए सीधे गर्भस्थ शिशु तक पहुंचती है। इसका मुख्य काम शिशु के फेफड़ों के विकास को तेज करना है, ताकि जन्म के बाद वह बिना किसी परेशानी के सांस ले सके। यह इंजेक्शन फेफड़ों के सिकुड़ने और फैलने की प्राकृतिक प्रक्रिया को सक्रिय करता है, जिससे नवजात को सांस की गंभीर बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।

यह केवल फेफड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि शिशु की अन्य शारीरिक प्रणालियों को भी दुरुस्त और मजबूत बनाने में मदद करता है। समय पूर्व जन्म की स्थिति में यह एक जीवन रक्षक उपाय साबित होता है, जो बच्चे को बाहरी दुनिया में सुरक्षित रूप से सांस लेने और जीवित रहने के लिए तैयार करता है।

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