डीएम और कलेक्टर में अंतर क्या है?
डीएम (उपायुक्त) और कलेक्टर—दोनों नाम अक्सर एक दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल होते हैं, लेकिन क्या दोनों एक ही हैं? वास्तव में, ज्यादातर राज्यों में अब यह पद एक ही व्यक्ति के हाथ में होता है, फिर भी कानूनी और प्रशासनिक रूप से दोनों में अंतर है।
कलेक्टर का मुख्य काम जिले के राजस्व प्रबंधन से जुड़ा होता है। यह वह अधिकारी होता है जो भूमि रिकॉर्ड, लगान वसूली, और राजस्व अदालतों का प्रबंधन करता है। इस पद की उत्पत्ति ब्रिटिश काल से हुई थी, जब राजस्व एक जिले के प्रशासन की मुख्य जिम्मेदारी हुआ करती थी।
वहीं, डीएम यानी जिलाधिकारी का दायरा काफी व्यापक होता है। यह न केवल राजस्व का देखरेख करता है, बल्कि जिले के सामान्य प्रशासन, कानून-व्यवस्था, चुनाव प्रबंधन, और आपदा प्रबंधन के लिए भी जिम्मेदार होता है।
आजकल अधिकांश राज्यों में एक ही आईएएस अधिकारी को डीएम और कलेक्टर दोनों पदों की जिम्मेदारी दी जाती ह
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