सरसों के तेल में मिलावट का खेल: जानिए अपनी रसोई का सच

आजकल बाजारों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की शुद्धता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में किए गए एक परीक्षण में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पिछले एक साल के दौरान बाजार से लिए गए विभिन्न प्रमुख ब्रांडों के 71 सरसों तेल के सैंपलों में से 16 मिलावटी पाए गए हैं। इसका सीधा मतलब है कि हम जिस तेल को शुद्ध मानकर इस्तेमाल कर रहे हैं, उसमें से कई सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।

मिलावट का मुख्य कारण कीमतों का बड़ा अंतर और मुनाफाखोरी है। वर्तमान में असली सरसों तेल की कीमत लगभग 85 से 86 रुपये प्रति किलो है। वहीं दूसरी ओर, सोयाबीन डीओ (77-78 रुपये), पामोलीन (74-75 रुपये) और राइस ब्रॉन ऑइल (73-74 रुपये प्रति किलो) जैसे सस्ते तेल बाजार में उपलब्ध हैं। अधिक कमाई के चक्कर में मिलावटखोर 40 फीसदी सरसों के तेल में 60 फीसदी तक अन्य सस्ते तेल मिला रहे हैं।

सस्ते तेलों का यह मिश्रण न केवल ग्राहकों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुँचाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम पैदा करता है। इस प्रकार की मिलावट से बचने के लिए खरीदारी करते समय हमेशा एगमार्क (Agmark) और एफएसएसएआई (FSSAI) प्रमाणित उत्पादों का ही चयन करें और सतर्क रहें।

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