दादी माँ – स्नेह और ममता का अवतार

दादी माँ हमारे जीवन में सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्यार, शांति और अनकहे समर्पण की मूर्ति होती हैं। उनके आँगन में बैठकर कहानियाँ सुनना, उनके हाथ की बनी चटपटी चाय की चुस्कियाँ लेना या फिर छोटी-सी गलती पर भी उनकी आँखों में छलकता चिंता का भाव – हर पल किसी खजाने से कम नहीं।

दादी माँ स्नेह एवं ममता की मूर्ति प्रतीत होती थीं। वे बिना किसी शर्त के प्यार बाँटती हैं। एक मुस्कान, एक दुपट्टे का किनारा, या फिर लड्डू के छोटे-छोटे टुकड़े – ये सब उनके प्यार के छोटे-छोटे सबूत होते हैं। वे न सिर्फ दादी माँ, बल्कि घर की रग-रग में फैली सुकून की तस्वीर होती हैं।

उनके कहानी सुनाने के तरीके में वो जादू होता है जो सदियों पुरानी परंपराओं को जिंदा रखता है। वे बिना कहे सिखा देती हैं – धैर्य, त्याग और निस्वार्थ प्रेम। आज के भागदौड़ भरे समय में जब रिश्ते भी डिजिटल होते जा रहे हैं, तब भी दादी माँ का प्यार अपनी गहराई और सादगी में

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