सुंदरता का असली अर्थ: दादी की कहानी

दादी कभी भी शारीरिक रूप से 'आकर्षक' नहीं थीं। उनके चेहरे पर न तो कोई चमकदार खूबसूरती थी, न ही वे किसी फिल्मी अभिनेत्री जैसी लगती थीं। लेकिन फिर भी, जो लोग उन्हें जानते थे, वे सभी कहते—दादी सचमुच सुंदर थीं। कैसे? क्योंकि उनकी सुंदरता त्वचा या आकृति में नहीं, बल्कि उनके चरित्र में थी।

उनके छोटे से घर में आने वाला हर व्यक्ति उनकी ममता और सहजता से छू जाता। वे कभी नहीं झगड़तीं, कभी किसी की बुराई नहीं करतीं। उनके आँचल में बच्चों का डर भाग जाता। वे चाय पीने आए अजनबी को भी ऐसा सम्मान देतीं, मानो वह पली बढ़ी परिचित हो।

दादी की सुंदरता उनके गुणों में छिपी थी—दया, सहनशीलता, सच्चाई और निस्वार्थ प्रेम। ये गुण उनके अंदर एक ऐसी चमक पैदा कर देते थे, जो आँखों से नहीं, दिल से दिखती थी। इसीलिए वे 'सुंदर' नहीं थीं, लेकिन हर तरह से 'सुंदर' थीं।

कभी-कभी सुंदरता तस्वीरों और एहसासों में नहीं,

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