नोट कैसे छापे जाते हैं: कौन से देश बनाते हैं अपनी करेंसी?

जब भी हम पैसों की बात करते हैं, तो अक्सर लगता है कि हर देश अपना पैसा खुद ही छापता होगा। लेकिन सच्चाई इससे काफी अलग और दिलचस्प है। दुनिया भर के सैकड़ों केंद्रीय बैंक अपनी मुद्रा (करेंसी) खुद छापने के बजाय इसे दूसरे देशों या प्राइवेट कंपनियों से बनवाते हैं। उदाहरण के लिए, फ़िनलैंड और डेनमार्क जैसे विकसित देश भी अपने नोटों की छपाई बाहर से आउटसोर्स करते हैं।

नोट छापना बेहद जटिल और खर्चीला काम है। इसके लिए खास तरह के कागज़, सुरक्षात्मक धागे, वाटरमार्क और एडवांस वॉटर-प्रूफ इंक की ज़रूरत होती है। इस उच्च-सुरक्षा वाली तकनीक और सेटअप को बनाए रखना हर देश के लिए किफायती नहीं होता। यही वजह है कि अफ्रीका और यूरोप के कई छोटे-बड़े देश अपनी करेंसी छापने का ठेका specialized विदेशी कंपनियों को देते हैं।

दुनिया में केवल कुछ गिने-चुने देश ही ऐसे हैं जो पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं और अपने करेंसी नोट खुद तैयार करते हैं। भारत और अमेरिका जैसे देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को ध्यान में रखते हुए अपनी मुद्राएं खुद ही डिजाइन और प्रिंट करते हैं। भारत में सिक्युरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और भारतीय रिजर्व बैंक मिलकर इस पूरी प्रक्रिया को संभालते हैं, जिससे देश की करेंसी पूरी तरह सुरक्षित रहे।

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