देवताओं की उम्र: पौराणिक गणना और रहस्य

अक्सर हमारे मन में यह सवाल उठता है कि देवताओं की आयु कितनी होती है? क्या वे अमर हैं या उनकी भी एक निश्चित जीवन सीमा होती है? हिंदू धर्मशास्त्रों और पुराणों में समय की गणना बेहद सूक्ष्म और विशाल तरीके से की गई है, जहाँ मनुष्यों और देवताओं के समय चक्र में बड़ा अंतर बताया गया है।

शास्त्रों के अनुसार, मनुष्य का एक वर्ष देवताओं के मात्र एक दिन (अहोरात्र) के बराबर होता है। इस हिसाब से जब धरती पर 365 वर्ष बीत जाते हैं, तब देवलोक में केवल एक वर्ष पूरा होता है। समय की इस दिव्य गणना के आधार पर देवताओं की कुल आयु लगभग 1,33,22,500 (एक करोड़ तैंतीस लाख बाइस हज़ार पाँच सौ) मनुष्य वर्षों के बराबर मानी गई है।

हालांकि सामान्य बोलचाल में देवताओं को 'अमर' कहा जाता है, लेकिन पौराणिक दृष्टिकोण से अमरता का अर्थ पूर्ण विनाशहीनता नहीं, बल्कि मनुष्यों की तुलना में अत्यंत लंबी आयु और दिव्य शक्तियाँ होना है। एक निश्चित महाकल्प या ब्रह्मा जी के एक कालचक्र के पूरा होने पर संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रलय होता है, जिसमें देवलोक और देवताओं का अस्तित्व भी पुनः सृष्टि चक्र में विलीन हो जाता है। यही कारण है कि भारतीय दर्शन में केवल परमेश्वर को ही पूर्णतः अनश्वर माना गया है।

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