देवताओं की माता: देवी अदिति और उनके पुत्र
वैदिक परंपरा और हिंदू पुराणों में अदिति को देवताओं की माता का स्थान दिया गया है। वे चेतना, आकाश और अनंतता का प्रतीक मानी जाती हैं। अदिति की संतान होने के कारण ही मुख्य देवताओं को आदित्य कहा जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रमुख 33 कोटि देवताओं में अदिति के 12 दिव्य पुत्रों का विशेष महत्व है, जो वर्ष के 12 महीनों और सूर्य के विभिन्न स्वरूपों को दर्शाते हैं। इनके नाम विवस्वान्, अर्यमा, पूषा, त्वष्टा, सविता, भग, धाता, विधाता, वरुण, मित्र, इंद्र और त्रिविक्रम (भगवान वामन) हैं। इनमें से इंद्र को देवराज और विवस्वान् को सूर्य देव के रूप में पूजा जाता है, जबकि वामन अवतार में श्री हरि विष्णु ने अदिति के पुत्र के रूप में जन्म लिया था।
अदिति न केवल देवों को जन्म देने वाली माता हैं, बल्कि वे ब्रह्मांडीय संतुलन और पोषण की भी संवाहक हैं। उनकी कथाएं हमें सनातन संस्कृति की प्राचीन और समृद्ध परंपरा से जोड़ती हैं।
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