धरती किसकी बेटी है?
प्राचीन कथाओं के अनुसार, धरती को ऋषि-मुनियों और जनसमुदाय के बीच एक पवित्र संबंध माना जाता है। जब पृथु राजा बने, तो उन्होंने धरती को अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण उन्होंने इसका नाम पृथ्वी रखा, जो आज भी हमारे दैनिक जीवन में प्रचलित है।
यह कहानी केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक विकास का भी प्रतीक है। जब तक धरती पर खाद्यान्न की कमी थी, लोगों को संकट का सामना करना पड़ता था। पृथु ने धरती को जोतकर खेती की शुरुआत की, जिससे समाज में नियम, व्यवस्था और संस्कृति का विकास हुआ।
इस तरह, पृथु को धरती का पहला राजा माना जाता है, जिन्होंने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर मानव समाज को स्थिरता दी। धरती को उनकी पुत्री मानने की कथा सिर्फ एक नामकरण नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आदर और जिम्मेदारी का संदेश भी है।
आज भी, जब हम पृथ्वी की बात करते हैं, तो उस पुराने बंधन की याद आती है — जहाँ राजा ने धरती को अपना बच्चा माना
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