आंखों का रंग नीला क्यों होता है?
क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोगों की आंखें इतनी सुंदर नीली क्यों होती हैं? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से विज्ञान और हमारे शरीर का पिगमेंटेशन है। हमारी आंखों का रंग आइरिस यानी परितारिका में मौजूद मेलेनिन (melanin) नाम के पिगमेंट की मात्रा पर निर्भर करता है। मेलेनिन वही प्राकृतिक पिगमेंट है जो हमारी त्वचा और बालों का रंग भी तय करता है।
जब आइरिस में मेलेनिन की मात्रा बहुत कम होती है, तो रोशनी आंखों से टकराकर वापस लौटती है और प्रकाश के प्रकीर्णन (scattering) के कारण आंखें नीली दिखाई देती हैं। इसके विपरीत, जिन लोगों की आंखों में मेलेनिन की मात्रा अधिक होती है, उनकी आंखें भूरी या गहरी दिखाई देती हैं। नीली आंखों में असल में कोई नीला रंग नहीं होता, यह केवल प्रकाश का एक ऑप्टिकल प्रभाव होता है, ठीक वैसे ही जैसे आसमान का रंग नीला दिखाई देता है।
यही वजह है कि कई नवजात बच्चों का जन्म नीली आंखों के साथ होता है। जन्म के समय उनके शरीर ने पर्याप्त मेलेनिन का निर्माण नहीं किया होता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है और धूप के संपर्क में आता है, उसके शरीर में मेलेनिन की मात्रा बढ़ने लगती है और कुछ महीनों या सालों में आंखों का असली रंग (जो आमतौर पर भूरा या काला होता है) सामने आने लगता है।
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