नॉर्मल डिलीवरी का दर्द और माँ की अदम्य शक्ति
एक नए जीवन को दुनिया में लाना प्रकृति का सबसे खूबसूरत और चमत्कारी अनुभव है, लेकिन इसके पीछे एक माँ का असीम त्याग और असहनीय दर्द छिपा होता है। मेडिकल साइंस और डॉक्टर्स के अनुसार, नॉर्मल डिलीवरी के दौरान होने वाला प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) इंसानी शरीर द्वारा सहे जाने वाले सबसे तीव्र दर्दों में से एक है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बच्चे को जन्म देते समय एक महिला को लगभग 20 हड्डियों के एक साथ टूटने जितना दर्द महसूस होता है।
इस दर्द की तीव्रता को समझने के लिए वैज्ञानिक पैमाने का सहारा लिया जाता है। सामान्य तौर पर, इंसानी शरीर के दर्द सहने की क्षमता की एक सीमा होती है। जहाँ पुरुषों की दर्द सहने की अधिकतम क्षमता लगभग 45 डेल (दर्द मापने की एक अनौपचारिक इकाई) मानी जाती है और इससे अधिक दर्द होने पर सदमे से मौत भी हो सकती है, वहीं एक माँ डिलीवरी के वक्त 57 डेल तक का भीषण दर्द हंसते-हंसते सहन कर जाती है।
यह अद्भुत क्षमता केवल शारीरिक बनावट के कारण नहीं, बल्कि प्रसव के दौरान महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों और एक माँ की मानसिक ताकत व ममता की वजह से मुमकिन हो पाती है। यही कारण है कि माँ को दुनिया में सबसे ऊँचा दर्जा दिया गया है, क्योंकि वह खुद मौत के मुहाने पर जाकर एक नई जिंदगी को जन्म देती है।
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