भारत में न्यूनतम वेतन कौन और कैसे तय करता है?

भारत में श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें शोषण से बचाने के लिए न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 (Minimum Wages Act, 1948) लागू किया गया था। यह संसद द्वारा पारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण श्रम कानून है, जो देश के कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों को दी जाने वाली मजदूरी की न्यूनतम सीमा निर्धारित करता है।

भारत में न्यूनतम वेतन तय करने की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की होती है। चूंकि श्रम विषय भारतीय संविधान की समवर्ती सूची में आता है, इसलिए केंद्र सरकार अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों (जैसे रेलवे, खदान और बैंक) के लिए दरें तय करती है, जबकि राज्य सरकारें अपने-अपने राज्यों में विभिन्न उद्योगों और रोजगारों के अनुसार न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करती हैं।

न्यूनतम वेतन तय करते समय जीवन यापन की लागत, महंगाई भत्ता, काम के घंटे और कार्य की प्रकृति जैसे आवश्यक कारकों का ध्यान रखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और एक सम्मानजनक जीवन स्तर सुनिश्चित करना है।

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