भारतीय संगीत में पंचम स्वर और मध्यम ग्राम का रहस्य

भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्राचीन श्रुति सिद्धांत में २२ श्रुतियों का विशेष महत्व है। सामान्यतः षड्ज ग्राम में पंचम (प) स्वर को चार श्रुतियों वाला माना जाता है और यह १७वीं श्रुति पर स्थित होता है। लेकिन जब हम मध्यम ग्राम की चर्चा करते हैं, तो पंचम का स्थान और स्वरूप बदल जाता है।

मध्यम ग्राम में पंचम स्वर अपने मूल स्थान से एक श्रुति नीचे खिसककर १६वीं श्रुति पर आ जाता है। इस सूक्ष्म अंतर (जिसे प्रमाण श्रुति भी कहा जाता है) के कारण पंचम त्रिश्रुतिक (तीन श्रुति का) बन जाता है। पंचम के एक श्रुति कम होने का सीधा प्रभाव धैवत स्वर पर पड़ता है, जिससे धैवत तीन के बजाय चतुश्रुतिक (चार श्रुति का) हो जाता है।

मध्यम ग्राम का मुख्य आधार इसका षड्ज-मध्यम संवाद है। इसमें ९ श्रुतियों के अंतराल पर परस्पर स्वर जोड़ियाँ बनती हैं, जैसे सा-म, रे-प, ग-ध, म-नि और प-सा। यही विशिष्ट श्रुत्यांतर मध्यम ग्राम के अद्वितीय स्वरूप का निर्माण करता है।

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