पाकिस्तान का रुपया कमजोर होने के कारण

पिछले कुछ समय से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही है, जिसका सीधा असर वहां की मुद्रा पर पड़ा है। पाकिस्तानी रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर बना हुआ है। किसी भी देश की करेंसी उसकी आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का आईना होती है, और पाकिस्तान के मामले में ये दोनों ही मोर्चे काफी कमजोर नजर आ रहे हैं।

रुपये में इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा कारण बढ़ता कारोबारी घाटा (Trade Deficit) है। पाकिस्तान विदेशों से सामान आयात (Import) तो बहुत ज्यादा कर रहा है, लेकिन उस मुकाबले में उसका निर्यात (Export) बेहद कम है। इसके कारण देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार खाली होता जा रहा है। जब देश के पास डॉलर की कमी होती है, तो उसकी अपनी करेंसी की कीमत गिरने लगती है।

इसके अलावा, राजनैतिक अस्थिरता (Political Instability) ने आग में घी का काम किया है। सरकारों के बदलने और आंतरिक विवादों के कारण विदेशी निवेशक वहां पैसा लगाने से डरते हैं। हालांकि, जब भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बेलआउट पैकेज या लोन मिलने की उम्मीद जगती है, तो रुपये को थोड़ी मजबूती मिलती है, जैसा कि जुलाई 2022 की शुरुआत में देखा गया था जब रुपया सुधरकर 204 के स्तर पर आया था। लेकिन लोन मिलने में देरी और सख्त शर्तों के कारण यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाती और रुपया फिर से गोता लगाने लगता है। कुल मिलाकर, जब तक देश में राजनीतिक स्थिरता नहीं आती और उत्पादन नहीं बढ़ता, तब तक रुपये की सेहत सुधरना मुश्किल है।

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