पाकिस्तान का गहराता आर्थिक संकट और बढ़ती गरीबी
वर्तमान समय में पड़ोसी देश पाकिस्तान एक गंभीर और अभूतपूर्व आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। इस बदतर होती स्थिति का सबसे बुरा असर आम जनता की आजीविका पर पड़ा है, जहां महंगाई और बेरोजगारी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
विश्व बैंक की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति की असल तस्वीर डरावनी है। शहरों की तुलना में वहां के ग्रामीण इलाकों के हालात बेहद खराब हैं। आंकड़ों के मुताबिक, गांवों की 80 फीसदी आबादी गरीब है और लगभग 62 फीसदी ग्रामीण आबादी गरीबी रेखा से भी नीचे जीवन बसर करने को मजबूर है। लोगों के पास बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त संसाधन नहीं बचे हैं।
देश की सरकारी तिजोरी खाली होने के कगार पर पहुंच चुकी है। हालात इस हद तक बिगड़ गए थे कि खर्च चलाने और कर्ज चुकाने के लिए सरकार को प्रधानमंत्री आवास की भैंसों और लग्जरी कारों तक की नीलामी करनी पड़ी थी। यह प्रशासनिक और आर्थिक बदहाली का एक बड़ा उदाहरण है, जो देश के भीतर गहरे संकट की गवाही देता है।
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