पाकिस्तान में हिंदू आबादी का इतिहास और वर्तमान स्थिति

1947 में विभाजन के समय पश्चिम पाकिस्तान के क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी लगभग 15% थी। विभाजन के दौरान हुए बड़े पैमाने पर विस्थापन और हिंसा के कारण यह आंकड़ा बहुत तेजी से घटा। 1951 में हुई पहली जनगणना तक पाकिस्तान में हिंदुओं की जनसंख्या गिरकर महज 2% के आसपास रह गई थी।

विभाजन के बाद भी सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण पलायन का यह सिलसिला थमा नहीं। वर्ष 1964 के हिंदू-विरोधी दंगों के बाद भी बड़ी संख्या में हिंदुओं ने सुरक्षा की तलाश में भारत की ओर रुख किया। धार्मिक उत्पीड़न, सामाजिक असुरक्षा और भेदभाव जैसे कारणों ने अल्पसंख्यक समुदाय को लगातार प्रभावित किया।

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान की कुल जनसंख्या में हिंदुओं की हिस्सेदारी घटकर लगभग 1.6% रह गई है, जिनमें से अधिकांश आबादी सिंध प्रांत में निवास करती है। लगातार चुनौतियों और उत्पीड़न से बचने के लिए आज भी कई परिवार पलायन करने पर मजबूर हैं।

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