प्यार: एक बीमारी या जीवन की अमृत घड़ी?

प्यार को अक्सर भावनाओं की चरम सीमा माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह एक तरह की बीमारी के रूप में भी देखा जाता है? प्राचीन दार्शनिक प्लेटो ने एक बार कहा था, "प्रेम एक गंभीर मानसिक रोग है।" आज के विज्ञान ने उनकी बात को कुछ हद तक सच साबित कर दिया है। जब कोई प्यार में पड़ता है, तो उसके दिमाग में डोपामाइन, सेरोटोनिन और ऑक्सीटोसिन जैसे रसायनों का स्तर बदल जाता है।

यह वही रासायनिक उथल-पुथल है जो कोकीन या अन्य नशीली दवाओं के प्रभाव के समान होती है। इसीलिए प्यार में डूबे लोग अक्सर व्यवहार में बदलाव दिखाते हैं—अति उत्साह, नींद न आना, या फिर किसी एक व्यक्ति के बारे में लगातार सोचना। यह सब एक तरह का 'हाई' है, जो दिमाग को आनंद के शिखर पर पहुंचा देता है।

लेकिन जब प्यार टूटता है, तो यही उच्चता गहरे निराशा में बदल जाती है। तब यह बीमारी जैसा लगने लगती है—दुख, अकेलापन, और तनाव। फिर भी,

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