प्रेग्नेंसी और गर्भधारण की प्रक्रिया

मां बनना हर महिला के जीवन का एक बेहद खूबसूरत और महत्वपूर्ण अहसास होता है, लेकिन गर्भधारण या प्रेग्नेंट होने की प्रक्रिया पूरी तरह से जैविक और समय चक्र (Biological Cycle) पर निर्भर करती है। आमतौर पर असुरक्षित यौन संबंध (Unprotected Sex) के बाद गर्भधारण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो संबंध बनाने के महज तीन मिनट से लेकर पांच दिनों के भीतर कंसेप्शन यानी गर्भधारण हो सकता है। पुरुष के स्पर्म (Sperm) महिला के शरीर के भीतर करीब 5 दिनों तक जीवित रह सकते हैं। जब महिला के अंडाशय से अंडा बाहर आता है (जिसे ओवुलेशन पीरियड कहा जाता है), और वह फैलोपियन ट्यूब में स्पर्म से मिलता है, तो इसे फर्टिलाइजेशन (निषेचन) कहते हैं।

गर्भधारण के लिए महिला का ओवुलेशन के दिनों में होना सबसे जरूरी है। यह आमतौर पर मासिक धर्म (Periods) के बीच के दिनों में होता है। जब फर्टिलाइजेशन की यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो उसके अगले 5 से 10 दिनों के भीतर इंप्लांटेशन होता है, जिसमें निषेचित अंडा गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाता है। इसी चरण के बाद एक महिला आधिकारिक तौर पर प्रेग्नेंट होती है और शरीर में प्रेग्नेंसी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

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