भारत में बच्चा गोद लेने की सही प्रक्रिया

भारत में किसी बच्चे को गोद लेना (अडॉप्ट करना) एक बेहद नेक और जीवन बदलने वाला निर्णय है। कानूनी और सुरक्षित तरीके से बच्चा गोद लेने के लिए सरकार ने एक सुव्यवस्थित व्यवस्था बनाई है। इसके लिए इच्छुक माता-पिता को केवल सेंट्रल अडाप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) की आधिकारिक वेबसाइट cara.nic.in पर जाकर अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है। 'कारा' महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की एक नोडल संस्था है जो गोद लेने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करती है।

रजिस्ट्रेशन के बाद, आवेदकों के दस्तावेजों की जांच की जाती है और एक होम स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके बाद एक मेरिट लिस्ट (वरिष्ठता सूची) बनती है। मान्यता प्राप्त और मंजूरशुदा अनाथालयों या बाल गृहों में बच्चों की उपलब्धता और माता-पिता के इस लिस्ट में स्थान के आधार पर ही किसी जरूरतमंद दंपती को बच्चा सौंपा जाता है।

अक्सर अनचाहे या अनाथ बच्चों की सुरक्षा के लिए अस्पतालों और अनाथालयों के बाहर 'पालना' (पंगूड़ा) लगाया जाता है। जब कोई बच्चा इस पंगूड़े में आता है, तो उसे तुरंत सुरक्षित रूप से जिला बाल संरक्षण इकाई या अधिकृत अनाथालयों में भेज दिया जाता है। वहाँ बच्चे की चिकित्सकीय जांच और कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, उसे भी कारा के सिस्टम के जरिए ही गोद दिया जाता है। कानूनी प्रक्रिया का पालन करना इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में बच्चे और माता-पिता दोनों के अधिकार सुरक्षित रहें।

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