बच्चे देर से क्यों बोलते हैं? जानिए इसके मुख्य कारण

हर माता-पिता के लिए वह पल बेहद खास होता है जब उनका बच्चा पहली बार कोई शब्द बोलता है। आमतौर पर बच्चे एक से डेढ़ साल की उम्र में छोटे-छोटे शब्द बोलना शुरू कर देते हैं। लेकिन कई बार कुछ बच्चे इस उम्र के बाद भी नहीं बोल पाते, जिसे 'स्पीच डिले' या देर से बोलना कहा जाता है। माता-पिता के लिए यह स्थिति थोड़ी चिंताजनक हो सकती है, इसलिए इसके पीछे के कारणों को समझना जरूरी है।

बच्चों के देर से बोलने के पीछे कई शारीरिक, मानसिक और आनुवंशिक कारण हो सकते हैं। सबसे मुख्य कारणों में से एक है सुनने की क्षमता में कमी। अगर बच्चा आपकी बातें ठीक से सुन नहीं पा रहा है, तो उसके लिए शब्दों को समझना और दोहराना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, जन्म के समय कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या, समय से पहले जन्म (प्रीमेच्योर डिलीवरी) या आनुवंशिक (जेनेटिक) कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। कुछ मामलों में जीभ या तालू की बनावट में दिक्कत (जैसे टंग-टाई) होने के कारण भी बच्चों को बोलने में कठिनाई होती है।

आजकल के डिजिटल दौर में एक बड़ा कारण स्क्रीन टाइम का बढ़ना और आपसी बातचीत की कमी भी है। अगर बच्चे को घर में बातचीत का माहौल नहीं मिलता, तो उसका भाषा विकास धीमा हो जाता है। बच्चों के उचित मानसिक और शारीरिक विकास के लिए यह बेहद जरूरी है कि उनके सुनने और बोलने की क्षमता की सही समय पर जांच हो। अगर आपका बच्चा दो साल का होने के बाद भी बुनियादी शब्द नहीं बोल पा रहा है, तो बिना देर किए किसी विशेषज्ञ या स्पीच थेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए ताकि सही समय पर उसकी मदद की जा सके।

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