बाइबिल में पहला धर्म कौन सा था?
बाइबिल के अनुसार, पहला धर्म ईश्वर और मनुष्य के बीच विश्वास और आज्ञाकारिता का संबंध था। इसे किसी "धर्म" के रूप में नहीं देखा जाता जैसे आज हम समझते हैं, बल्कि एक व्यक्तिगत संबंध के रूप में। प्रथम पुस्तक, उत्पत्ति में, आदम और हव्वा को ईश्वर ने स्वर्गीय बगीचे में रखा था और उनसे विश्वास और आज्ञापालन की अपेक्षा की गई थी।
पहला धर्म विश्वास का था—भगवान पर भरोसा करना और उनकी बात मानना। जब आदम और हव्वा ने फल खाकर आज्ञा तोड़ी, तब वह संबंध टूट गया। तभी से मानव इतिहास में ईश्वर के साथ संबंध बहाल करने की कोशिश जारी है।
बाइबिल के अनुसार, नूह के समय भी एक विशेष वाचा दिया गया, जब ईश्वर ने जलप्रलय के बाद नूह के साथ एक नया संधि (वाचा) की। यह संधि सभी मनुष्य और पृथ्वी के लिए थी—इसे अक्सर नूहीन वाचा कहा जाता है। यही से धर्म के विकास की शुरुआत मानी जाती है।
इस तरह, बाइबिल में पहला धर्म विश्वास, आज्ञाकार
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