बाबरी मस्जिद के नीचे क्या मिला?
अयोध्या का इतिहास और वहां की जमीन के नीचे छिपे अवशेष हमेशा से ही गहरी दिलचस्पी और शोध का विषय रहे हैं। बाबरी मस्जिद के नीचे क्या था, इस सवाल का जवाब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई ऐतिहासिक खुदाई में मिलता है। इस महत्वपूर्ण खोज में प्रसिद्ध पुरातत्वविद बी. बी. लाल और उनकी टीम का अमूल्य योगदान रहा है, जिन्होंने 1976 में राम जन्मभूमि परिसर के आसपास पुरातात्विक खुदाई की थी।
इस टीम के एक प्रमुख सदस्य और जाने-माने पुरातत्वविद के. के. मुहम्मद ने दुनिया के सामने यह बात रखी कि खुदाई के दौरान मस्जिद के ढांचे के नीचे एक प्राचीन मंदिर के पुरातात्विक साक्ष्य मिले थे। पुरातत्वविदों को खुदाई में मंदिर के स्तंभ (पिलर बेस), नक्काशीदार पत्थर, कलाकृतियां और टेराकोटा की मूर्तियां प्राप्त हुई थीं। ये अवशेष इस बात की ओर इशारा करते थे कि वहां पहले एक विशाल हिंदू धार्मिक संरचना मौजूद थी।
ASI की विभिन्न रिपोर्टों और वैज्ञानिक जांचों में यह बात सामने आई कि मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद एक प्राचीन ढांचे के ऊपर किया गया था। साल 2019 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने ऐतिहासिक फैसले में इन पुरातात्विक साक्ष्यों को बेहद महत्वपूर्ण माना। पुरातत्व विभाग की इस खोज ने न केवल इतिहास के पन्नों को स्पष्ट किया, बल्कि इस पूरे विवाद को सुलझाने में एक निर्णायक भूमिका भी निभाई।
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