बिलावल थाट और इसके राग
भारतीय शास्त्रीय संगीत में थाट प्रणाली का एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। संगीत पद्धतियों को समझने और रागों के वर्गीकरण के लिए पंडित विष्णु नारायण भातखंडे जी ने दस मुख्य थाटों की रचना की थी। इन्हीं प्रमुख थाटों में से एक है बिलावल थाट, जिसे संगीत के बुनियादी और शुद्ध थाट के रूप में जाना जाता है।
जब बिलावल थाट की बात आती है, तो इसमें सभी स्वर शुद्ध प्रयोग किए जाते हैं। बिलावल थाट के अंतर्गत कई लोकप्रिय और सुंदर राग आते हैं। इस थाट का आश्रय राग स्वयं राग अलहैया बिलावल है। इसके अलावा, राग देशकार, राग दुर्गा, राग बिहाग और राग शंकरा जैसे प्रसिद्ध राग भी इसी थाट से उत्पन्न माने जाते हैं या इसके काफी निकट हैं।
संगीत की पुरानी बंदिशों और पारंपरिक गीतों में दस थाट, दस राग और दस गीत का सुंदर वर्णन मिलता है। बिलावल थाट के राग प्रायः दिन के प्रथम प्रहर या सुबह के समय गाए-बजाए जाते हैं। इन रागों को सुनने से मन को असीम शांति, सकारात्मकता और प्रसन्नता की अनुभूति होती है। संगीत सीखने वाले विद्यार्थियों के लिए बिलावल थाट के रागों का अभ्यास सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम माना जाता है।
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