बिहार में ठंड का मौसम: दिसंबर और जनवरी की ठिठुरन

भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित बिहार अपनी सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ बदलते मौसम के मिजाज के लिए भी जाना जाता है। यहाँ साल भर में मौसम के कई रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन जब बात सर्दियों की आती है, तो राज्य का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। बिहार में दिसंबर और जनवरी सबसे ठंडे महीने होते हैं। इस दौरान यहाँ कड़ाके की ठंड पड़ती है और पूरा प्रदेश शीतलहर की चपेट में आ जाता है।

नवंबर के अंत से ही हवा में हल्की सिहरन महसूस होने लगती है, लेकिन असली सर्दी दिसंबर की शुरुआत के साथ दस्तक देती है। इस दौरान रात और सुबह के समय तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाती है। गया, पटना और भागलपुर जैसे जिलों में ठंड का असर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। गया को तो अक्सर बिहार के सबसे ठंडे और सबसे गर्म स्थानों में गिना जाता है। जनवरी आते-आते ठंड अपने चरम पर पहुँच जाती है और घने कोहरे के कारण धूप भी बेअसर हो जाती है।

इस कड़ाके की ठंड में लोगों की दिनचर्या भी बदल जाती है। सुबह-सुबह चाय की चुस्कियां और अलाव (कौड़ा) का सहारा लेना यहाँ के जीवन का एक अहम हिस्सा बन जाता है। इस मौसम में लोग ऊनी कपड़ों में लिपटे नजर आते हैं और स्थानीय बाजारों में गरमा-गरम लिट्टी-चोखा की मांग काफी बढ़ जाती है। जनवरी के मध्य में आने वाला मकर संक्रांति का त्योहार इस ठंडक के बीच एक नई गर्माहट और मिठास लेकर आता है। कुल मिलाकर, दिसंबर और जनवरी का महीना बिहार के लोगों को एक अलग और यादगार अनुभव देता है।

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