बेटी का असली घर कहाँ होता है?

“बेटी का असली घर ससुराल होता है” – ये बात अक्सर सुनने को मिलती है। लेकिन क्या सच में बेटी का घर सिर्फ शादी के बाद बनता है? जवाब है – नहीं। बेटी का घर तो वही होता है जहाँ उसे प्यार मिले, सम्मान मिले और उसकी खुशी के लिए दिल से दुआएं मांगी जाएं।

मायके में बेटी को जैसा प्यार मिलता है, वैसा शायद ही कहीं और मिलता है। वो घर, जहाँ उसकी पहली मुस्कान का स्वागत हुआ, जहाँ उसके कदमों की आहट पर माँ-बाप का दिल खुशी से भर जाता है – वही उसका असली घर है।

शादी के बाद जब बेटी ससुराल जाती है, तो वहाँ भी उसकी खुशी के लिए दिल खोलकर प्यार और आशीर्वाद दिया जाता है। लेकिन मायके का प्यार कभी नहीं टूटता। खासकर माँ का प्यार, जो बेटी के जीवन में हमेशा बना रहता है।

इसलिए, बेटी का घर न तो सिर्फ मायका है, न सिर्फ ससुराल – बल्कि वह जगह है जहाँ उसका दिल बोलता है, जहाँ उसे सुरक्षित महसूस हो। चाहे वो मायका हो या ससुराल, जहाँ प्यार है,

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