बॉम्बे का पहला डॉन: हाजी मस्तान की कहानी

मुंबई के अंडरवर्ल्ड के इतिहास में जब भी पहले आधिकारिक डॉन की बात होती है, तो सबसे पहला नाम हाजी मस्तान का आता है। 1 मार्च 1926 को तमिलनाडु के कुड्डलोर में जन्मे मस्तान मिर्ज़ा ने अपनी शुरुआती ज़िंदगी बेहद तंगहाली में गुज़ारी। बेहतर भविष्य की तलाश में उनका परिवार मुंबई आ गया, जहाँ उन्होंने शुरुआती दिनों में कुली का काम भी किया। लेकिन जल्दी ही अमीर बनने की चाहत ने उन्हें अपराध की दुनिया की ओर मोड़ दिया।

हाजी मस्तान ने 1960 और 70 के दशक में समुद्र के रास्ते सोने, चाँदी और कीमती सामानों की बड़े पैमाने पर तस्करी (स्मगलिंग) करके बेहिसाब दौलत कमाई। उस दौर में मुंबई के बंदरगाहों से तस्करी का एक विशाल नेटवर्क चलता था, जिसके मस्तान बेताज बादशाह बन गए। उन्होंने सीधे तौर पर कभी हथियार नहीं उठाया, बल्कि अपनी सूझ-बूझ और पैसों की ताकत के दम पर पूरा साम्राज्य चलाया।

हाजी मस्तान की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने मुंबई अंडरवर्ल्ड को एक नया ग्लैमर और पहचान दी। वे हमेशा सफेद कपड़ों, महंगी सिगार और शानदार गाड़ियों में नज़र आते थे। बॉलीवुड हस्तियों के साथ उनके गहरे संबंध थे और वे फिल्मों में भी पैसा लगाते थे। उनकी इसी भव्य जीवनशैली ने अंडरवर्ल्ड को पहली बार मुख्यधारा के आकर्षण से जोड़ दिया।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय