भारत की सरहदें और उनके प्रकार

किसी भी देश की सुरक्षा और पहचान के लिए उसकी सीमाएं यानी बॉर्डर बेहद अहम होते हैं। भारत के संदर्भ में मुख्य रूप से सरहदों को तीन प्रमुख प्रकारों में बांटा जाता है, जिनका ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से बहुत महत्व है।

सबसे पहले बात करते हैं अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर (International Border) की। यह एक ऐसी मान्यता प्राप्त और कानूनी रूप से तय सीमा होती है जो दो स्वतंत्र देशों के बीच शांतिपूर्ण समझौतों के तहत निर्धारित की जाती है। भारत और पाकिस्तान या भारत और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों के बीच की सीमा इसी श्रेणी में आती है।

दूसरा महत्वपूर्ण प्रकार LOC यानी लाइन ऑफ कंट्रोल (नियंत्रण रेखा) है। यह वह सैन्य नियंत्रण रेखा है जो भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर क्षेत्र को विभाजित करती है। यह कोई स्थायी अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है, बल्कि यह वह रेखा है जहां 1972 के शिमला समझौते के बाद दोनों देशों की सेनाएं रुकी थीं।

तीसरा प्रकार LAC यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control) है, जिसका संबंध भारत और चीन से है। यह वह रेखा है जो भारतीय क्षेत्र को चीनी नियंत्रण वाले क्षेत्र से अलग करती है। इसे 'वास्तविक नियंत्रण रेखा' इसलिए कहा जाता है क्योंकि ज़मीन पर इसकी स्थिति समय के साथ बदलती रही है और इस पर दोनों देशों के बीच स्पष्ट कानूनी सहमति का अभाव है।

ये तीनों प्रकार की सरहदें भारत की भू-राजनीतिक स्थिति को तय करती हैं और देश की सुरक्षा व्यवस्था में इनकी भूमिका सबसे अहम होती है।

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