ब्रह्मा, विष्णु और महेश में सबसे पहले किसका जन्म हुआ?
सनातन धर्म और पुराणों में सृष्टि की उत्पत्ति को लेकर बेहद गहरा और आध्यात्मिक वर्णन मिलता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—में सबसे पहले किसका जन्म हुआ या किसकी उत्पत्ति सबसे पहले हुई? इस रहस्य का उत्तर हमें शिव महापुराण और प्राचीन शास्त्रों में मिलता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रिदेवों में से किसी एक का जन्म पहले या बाद में नहीं हुआ, बल्कि इन तीनों की उत्पत्ति एक साथ ही हुई है। परम ब्रह्म भगवान सदाशिव और प्रकृति स्वरूप आदिशक्ति दुर्गा के योग से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश प्रकट हुए। इस सृष्टि चक्र में सदाशिव को परम पिता और आदिशक्ति को जगत की माता माना गया है।
जब सृष्टि की रचना का समय आया, तब सदाशिव और आदिशक्ति की इच्छा से त्रिदेवों का प्राकट्य हुआ। इन तीनों देवों को ब्रह्मांड के संचालन के लिए अलग-अलग महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंपे गए। भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का निर्माता (सृजनकर्ता), भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार (संरक्षक) और भगवान महेश (शिव) को सृष्टि का संहारक बनाया गया।
इसलिए, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो त्रिदेवों में कोई भी छोटा या बड़ा, अथवा पहले या बाद में आने वाला नहीं है। ये तीनों एक ही परम चेतना के तीन अलग-अलग रूप हैं, जो संपूर्ण ब्रह्मांड के संतुलन को बनाए रखते हैं।
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